Mangalvar Vrat Katha – मंगलवार व्रत हनुमान जी की कथा और पूजा करने की विशेष विधि
मंगलवार व्रत कब से शुरू करें? ( Mangalvar Vrat kab se shuru kare? )
Mangalwar vrat katha – मंगलवार का व्रत शुरू करने के लिए सबसे शुभ समय शुक्ल पक्ष तिथि का पहला मंगलवार होता है। यदि आप मंगलवार का व्रत रखने की सोच रहे हैं तो इसी दिन से शुभारंभ करें।
मंगलवार का व्रत कैसे करे? ( Mangalvar ka vrat kaise kare? )
आइये जाने मंगलवार व्रत पूजा विधि : ( Mangalvar Vrat Puja Vidhi )
1. मंगलवार के दिन प्रातःकाल स्नान कर हनुमान जी की पूजा अर्चना करें।
2. घी का दीपक और धूप जलाएं।
3. हनुमान जी को लाल वस्त्र, सिन्दूर और भोग में लड्डू अर्पित करें।
4. इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें।
इस दिन हनुमान चालीसा लॉकेट ( Hanuman Chalisa Locket ) धारण करें, ऐसा करने से चालीसा में समाहित अलौकिक शक्तियां सदैव आपके साथ रहेंगी और बुरी शक्तियों से रक्षा प्रदान करेंगी।
5. इस दिन अपने मन को शांत और स्थिर रखने का प्रयास करें।
6. मंगलवार के दिन मीठी वस्तुओं को भगवान को अर्पित करने और प्रसाद में बाँटने से कष्ट कम होते हैं।
7. हनुमान जी का व्रत रखने वालों को दिन में एक ही बार भोजन ग्रहण करना चाहिए।
1. मंगलवार के दिन प्रातःकाल स्नान कर हनुमान जी की पूजा अर्चना करें।
2. घी का दीपक और धूप जलाएं।
3. हनुमान जी को लाल वस्त्र, सिन्दूर और भोग में लड्डू अर्पित करें।
4. इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें।
इस दिन हनुमान चालीसा लॉकेट ( Hanuman Chalisa Locket ) धारण करें, ऐसा करने से चालीसा में समाहित अलौकिक शक्तियां सदैव आपके साथ रहेंगी और बुरी शक्तियों से रक्षा प्रदान करेंगी।
5. इस दिन अपने मन को शांत और स्थिर रखने का प्रयास करें।
6. मंगलवार के दिन मीठी वस्तुओं को भगवान को अर्पित करने और प्रसाद में बाँटने से कष्ट कम होते हैं।
7. हनुमान जी का व्रत रखने वालों को दिन में एक ही बार भोजन ग्रहण करना चाहिए।

मंगलवार व्रत कथा (Mangalvar Vrat Katha )
मंगलवार व्रत कथा (Mangalwar Vrat Katha) का सम्बन्ध Hanuman ji ki Vrat Katha से है। प्राचीन समय की बात है एक नगर में ब्राह्मण दंपत्ति रहा करते थे जिनकी कोई संतान नहीं थी। यह उनके दुख का सबसे बड़ा कारण था परंतु दंपत्ति पूजा पाठ में बहुत विश्वास करते थे। वे बजरंगबली जी उपासना करते हुए हर समय पुत्र की कामना करते। ब्राह्मण की पत्नी हर मंगलवार हनुमान जी के व्रत का पूरी श्रद्धा से पालन भी करती थी और हनुमान जी को बिना भोग अर्पित किए वह ब्राह्मणी भोजन ग्रहण नहीं करती थी।
वह नियमों की बहुत पक्की थी पर एक बार ब्राह्मणी के नियम में थोड़ी गड़बड़ी हो गई क्योंकि इस दिन भोजन सही समय पर बन नहीं पाया। जिस कारण हनुमान जी को भोग लगाने में देर हो रही थी। इसपर ब्राह्मणी को बहुत अफसोस हुआ और उसने प्रण ले लिया कि वह अब अगले मंगलवार को हनुमान जी को भोग लगाने के बाद ही कुछ खाएगी।
इस तरह वह ब्राह्मणी छः दिन तक भूखी प्यासी रही और जैसे ही मंगलवार का दिन आया वह बेहोश होकर गिर पड़ी। ब्राह्मणी की भक्ति और श्रद्धा को हनुमान जी देख रहे थे। वे बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने आशिर्वाद के रूप में ब्राह्मणी को पुत्र प्रदान किया। साथ ही हनुमान जी ने यह भी कहा कि तुम्हारा पुत्र बहुत सेवा भाव वाला होगा।
वह नियमों की बहुत पक्की थी पर एक बार ब्राह्मणी के नियम में थोड़ी गड़बड़ी हो गई क्योंकि इस दिन भोजन सही समय पर बन नहीं पाया। जिस कारण हनुमान जी को भोग लगाने में देर हो रही थी। इसपर ब्राह्मणी को बहुत अफसोस हुआ और उसने प्रण ले लिया कि वह अब अगले मंगलवार को हनुमान जी को भोग लगाने के बाद ही कुछ खाएगी।
इस तरह वह ब्राह्मणी छः दिन तक भूखी प्यासी रही और जैसे ही मंगलवार का दिन आया वह बेहोश होकर गिर पड़ी। ब्राह्मणी की भक्ति और श्रद्धा को हनुमान जी देख रहे थे। वे बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने आशिर्वाद के रूप में ब्राह्मणी को पुत्र प्रदान किया। साथ ही हनुमान जी ने यह भी कहा कि तुम्हारा पुत्र बहुत सेवा भाव वाला होगा।
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