Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर का विवाद एवं इसका इतिहास
Ayodhya Ram Mandir : भगवान राम के समय पर अयोध्या इतनी खूबसूरत थी की मानो स्वर्ग धरती पर आ बसा हो, जब भगवान राम के जल समादी लेने के बाद स्वर्ग जैसी दिखने वाली अयोध्या पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। आने वाली कई पीड़ियों ने अयोध्या मे अपना शासन किया और तरह तरह के अन्य सुंदर निर्माण किये ।

लेकिन भारत मे हुए पानीपत युद्ध के बाद; भारत मे मुगलों शासन का आक्रमण इस कदर बाद गया की, आक्रमणकारियों ने भारत के हर मंदिर तहस नहस कर दिया, जिसमे शामिल वाराणसी, मथुरा और अयोध्या जैसे स्थान भी थे। आक्रमणकारियों ने मंदिर मे रहने वाले पुजारिओ की बहरेमी से हत्या करदी गई और मंदिर मे रखी सभी मूर्तियों को तोड़ कर खंडित कर दिया गया। लेकिन भगवान राम का आशीर्वाद सदा अयोध्या मे बना रहा, मुगल शासकों के कई अभियान चलाने के बावजूद भी वह अयोध्या मे बने हुए राम मंदिर दवस्त नहीं कर पाए।
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आखिर मे सन 1527 मे बाबर के आदेश पर उनके सेनापति मीर बाकी के द्वारा करवाया गया आक्रमणकारियों हमले मे राम मंदिर को तोड़ दिया गया और राम मंदिर को तोड़ कर बाबरी मस्जिद का निर्माण कर दिया गया। समय बीता फिर आया साल 1992 जब बाबरी मजसीद को लोगों की बड़ी हिंसक ने गिरा दिया गया, जसई कारण भारी दंगे शुरू हुए जिसमे लग भग 2000 से ज्यादा लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
इसके बाद भारत मे राम मंदिर को लेके कई कानूनी कारवाई चली जिसमे आखिर मे 8 मार्च 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर को लेके फैसले को अंजाम दिया, जिसमे कार्यकर्ताओ को 8 हफ्तों का समय दिया गया। जिसमे कार्यरताओ ने पूरे 8 हफ्ते का समय लिया और आखिर मे 1 अगस्त 2019 को वह रिपोर्ट को प्रस्तुत करने मे असफल रहे।
अंत मे सुप्रीम कोर्ट ने 06 अगस्त 2019 मे अयोध्या राम मंदिर /Ayodhya Ram Mandir के मामले को लेकर रोजाना सुनवाई शुरू करी। जिसमे 16 ऑक्टोबर को अयोध्या मामले की सुनवई पूरी हुई और फैसले को एक अंतिम तारिक के लिए आरक्षित रखा। फिर आया वो दिन जिसका इंटेजज़र हर एक भारतीय को था, तारिक 09 नवंबर 2019 जब अयोध्या मे ही राम मंदिर बनने का फैसला पूरे भारत को सुनाया गया।
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